Wednesday, December 1, 2021

वक़ार यूनुस ने 'हिन्दुओं के बीच नमाज़ पढ़ने' वाली टिप्पणी पर मांगी माफ़ी

वक़ार यूनुस

इमेज स्रोत, Getty Photos

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कोच वक़ार यूनुस ने ‘हिन्दुओं के सामने मोहम्मद रिज़वान का नमाज़ पढ़ना मेरे लिए बहुत ख़ास था’ टिप्पणी पर माफ़ी मांग ली है.

वक़ार यूनुस ने इस माफ़ी का एक वीडियो ट्विटर पर रीट्वीट किया है.

वीडियो में वक़ार कह रहे हैं, ”मेरा ऐसा इरादा बिल्कुल नहीं था. मैं तो धार्मिक चीज़ों को लेकर कभी टिप्पणी भी नहीं करता. ना मैं उस पर पंगा लेता हूँ. मैं बहुत उत्साहित था. पाकिस्तान ने मैच जीता था. मैं बहुत ज़्यादा उत्साहित था. मैंने रिज़वान को देखा था और उसी में कुछ ऐसे शब्द का इस्तेमाल कर दिया, जिससे हो सकता है कि किसी की भावना आहत हुई हो. मैं इसके लिए माफ़ी मांगता हूँ. अगर किसी को मेरी टिप्पणी से तकलीफ़ हुई है तो मैं इसके लिए माफ़ी मागंता हूँ. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था.”

वक़ार यूनुस ने माना कि उनसे ग़लती हो गई थी. हालाँकि वक़ार यूनुस ने ये भी कहा, ”पाकिस्तान ने मैच जीता था, इसलिए इसको ज़्यादा हवा दे दी गई. लेकिन मैं फिर भी मानता हूँ कि मुझे ये नहीं कहना चाहिए था.” इस वीडियो के अलावा वक़ार यूनुस ने एक ट्वीट कर भी माफ़ी मांगी है.

आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप में भारत पर पाकिस्तान की बड़ी जीत को वहाँ के गृह मंत्री शेख़ रशीद ने पहले इस्लाम की जीत से जोड़ा था. उसके बाद वक़ार यूनुस ने कहा था कि 24 अक्टूबर को दुबई में भारत के साथ मैच में ड्रिंक के दौरान मोहम्मद रिज़वान का नमाज़ पढ़ना उन्हें बहुत अच्छा लगा था.

वक़ार यूनुस ने एआरवाई न्यूज़ के एंकर काशिफ़ अब्बासी के शो ‘ऑफ़ द रिकॉर्ड’ में भारत पर पाकिस्तान की बड़ी जीत पर हो रही बहस में कहा था, ”पाकिस्तान के खिलाड़ियों में आक्रामकता भी थी. स्ट्राइक रोटेशन भी थी. उनके चेहरे पर वो आत्मविश्वास दिख रहा था. सबसे अच्छी बात जो रिज़वान ने की. उसने हिन्दुओं के बीच में खड़े होकर नमाज़ पढ़ी. वो मेरे लिए बहुत ही ख़ास था.”

जब वक़ार यूनुस ये सब कह रहे थे तो होस्ट काशिफ़ अब्बासी हँस रहे थे. इस बहस में शोएब अख़्तर भी मौजूद थे.

रिज़वान के नमाज़ पढ़ने का वीडियो क्लिप शोएब अख़्तर ने ट्वीट करते हुए लिखा था, ”अल्लाह उस सिर को किसी के आगे झुकने नहीं देता जो उसके सामने झुकता है. सुभानअल्लाह.”

वक़ार यूनुस पाकिस्तान के बेहतरीन क्रिकेटर रहे हैं. पाकिस्तानी टीम के कोच, कप्तान और तेज़ गेंदबाज़ भी रहे हैं. क्रिकेट ‘भद्रजनों का खेल है’ वाला जुमला पाकिस्तान से आ रही टिप्पणियों की रोशनी में और हास्यास्पद हो गया है.

वक़ार यूनुस के इस बयान को लोग आड़े हाथों ले रहे हैं. क्रिकेट विश्लेषक हर्षा भोगले ने ट्वीट कर कहा है, ”वक़ार यूनुस के क़द का व्यक्ति जब इस तरह की टिप्पणी करता है, तो मेरे लिए बहुत निराशाजनक होता है.”

भारत के पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने वक़ार को आड़े हाथों लेते हुए ट्वीट किया है. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘हिन्दुओं के बीच खड़े होकर नमाज़ पढ़ी, वो मेरे लिए बहुत स्पेशल था- वक़ार; खेल में यह जिहादी मानसिकता. यह आदमी कितना शर्मनाक है.”

बीजेपी के महासचिव बीएल संतोष ने ट्वीट कर कहा है, ”हम हर दिन यह उपदेश देते हैं कि प्रेम, खेल और कला की कोई सीमा नहीं होती. ‘अमन की आशा’ वाला पूरा गिरोह शेख़ रशीद और वक़ार यूनुस मामले में चुप है. देश वासियों को गुमराह करने वालों से सतर्क रहने की ज़रूरत है.”

पाकिस्तान के सीनियर पत्रकार रज़ा अहमद रुमी ने ट्वीट कर वक़ार यूनुस की टिप्पणी को शर्मनाक बताया है. रुमी ने अपने ट्वीट में लिखा है, ”वक़ार यूनुस की यह शर्मनाक टिप्पणी है. भारत में बड़ी मुस्लिम आबादी है. पाकिस्तान में लाखों की तादाद में हिन्दू हैं. खेल खेल है यह कोई दो धर्मों की लड़ाई नहीं है.”

पाकिस्तानी क्रिकेट और मज़हब के घालमेल की बहस कोई नई नहीं है. 2006 में डॉक्टर नसीम अशरफ़ को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था. उन्होंने तब अपने खिलाड़ियों से कहा था कि वे अपनी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी गतिविधियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित ना करें. हालांकि डॉक्टर नसीम के बयान का असर पाकिस्तान के खिलाड़ियों पर नहीं हुआ.

डॉक्टर नसीम अशरफ़ ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था, ”इसमें कोई शक़ नहीं है कि खिलाड़ियों की धार्मिक आस्था उन्हें प्रेरित करती है. यह एकजुट रखती है. लेकिन क्रिकेट और मज़हब के बीच संतुलन होना चाहिए.”

”मैंने इसे लेकर टीम के कप्तान इंज़माम-उल हक़ (तब कप्तान) से बात की है. हमें निजी आस्था को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इंज़माम से कहा है कि इस्लाम दूसरों पर अपना विचार थोपने की इजाज़त नहीं देता है.”

भारत के पूर्व क्रिकेटर सबा करीम से जब बीबीसी ने पूछा कि क्या खेल के दौरान धार्मिक चीज़ों का सार्वजनिक प्रदर्शन वाजिब है? इस सवाल के जवाब में सबा करीम ने कहा कि ”धार्मिक प्रैक्टिस से किसी का नुक़सान नहीं है लेकिन खेल को एक दूसरे धर्म के बनाम नहीं खड़ा करना चाहिए. क्रिकेट में प्रतिद्ंवद्विता खेल के स्तर पर होनी चाहिए न कि धर्म के आधार पर.”

(कॉपी – रजनीश कुमार)

Alex V Dare

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